राज्य में यूनानी चिकित्सा प्रणाली को सुदृढ़, प्रोत्साहित और नियंत्रित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 11 अक्टूबर 2008 को एक पृथक यूनानी सेवाएं निदेशालय की स्थापना की गई। अपनी स्थापना के बाद से ही, यह निदेशालय पूरे राज्य में यूनानी स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, औषधि निर्माण और जनस्वास्थ्य अभियानों के विकास में निरंतर कार्यरत है।
वर्तमान में राज्य में दो राजकीय यूनानी मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, जिनसे 100-100 बिस्तरों वाले शिक्षण अस्पताल संबद्ध हैं। इन संस्थानों में स्टेट तक्मील-उत-तिब कॉलेज और अस्पताल (स्थापना 1902) तथा राजकीय यूनानी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (स्थापना 1904) शामिल हैं। ये दोनों संस्थान महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं और भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) — जिसे पूर्व में भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (CCIM) के नाम से जाना जाता था — द्वारा मान्यता प्राप्त हैं।
ये राजकीय यूनानी मेडिकल कॉलेज साढ़े पांच वर्ष की अवधि का बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी (BUMS) पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं, साथ ही विभिन्न विशेषज्ञताओं में स्नातकोत्तर MD/MS (यूनानी) पाठ्यक्रम भी संचालित करते हैं। दोनों राजकीय कॉलेजों की संयुक्त स्नातक (UG) प्रवेश क्षमता 150 छात्रों की है, जबकि स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों में प्रतिवर्ष 72 छात्रों को प्रवेश दिया जाता है।
शासकीय संस्थानों के अतिरिक्त, राज्य में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय से संबद्ध 13 निजी यूनानी मेडिकल कॉलेज भी क्रियाशील हैं। ये संस्थान 730 स्नातक (UG) और 30 स्नातकोत्तर (PG) सीटों की कुल क्षमता के साथ यूनानी चिकित्सा शिक्षा हेतु अतिरिक्त अवसर प्रदान करते हैं।
निदेशालय राज्य भर में 254 राजकीय यूनानी अस्पतालों के एक व्यापक स्वास्थ्य नेटवर्क की देखरेख करता है, जिनमें 24 शहरी अस्पताल और 230 ग्रामीण अस्पताल शामिल हैं। यह व्यवस्था शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करती है।
8 अप्रैल 2022 के अभिलेखों के अनुसार, आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड, उत्तर प्रदेश के अंतर्गत 16,000 से अधिक पंजीकृत यूनानी चिकित्सक (हकीम) सूचीबद्ध हैं, जो राज्य में यूनानी प्रणाली की सुदृढ़ उपस्थिति और निरंतर प्रगति को दर्शाते हैं।
गुणवत्तापूर्ण औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निदेशालय के अंतर्गत लखनऊ में राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी औषधि निर्माण इकाई की स्थापना की गई है। यह इकाई राज्य भर के राजकीय यूनानी अस्पतालों और स्वास्थ्य शिविरों में दवाओं का निर्माण एवं आपूर्ति करती है। इसके अतिरिक्त, विभाग के अधीन 326 निजी यूनानी फ़ार्मेसियां कार्यरत हैं, जिनमें से 187 फ़ार्मेसियां 'गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस' (GMP) प्रमाणित हैं, जो औषधि उत्पादन और वितरण में गुणवत्ता के मानकों को सुनिश्चित करती हैं।