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यूनानी चिकित्सा पद्धति का संक्षिप्त परिचय
यूनानी चिकित्सा पद्धति विश्व की सबसे प्राचीन और समग्र (Holistic) स्वास्थ्य प्रणालियों में से एक है, जो आज भी प्रभावी रूप से प्रचलित है। इसकी उत्पत्ति प्राचीन यूनानी (ग्रीक) चिकित्सा परंपरा से हुई, जिसे बाद में अरब और फ़ारसी विद्वानों ने विकसित एवं समृद्ध बनाकर एक सुव्यवस्थित चिकित्सा विज्ञान का रूप दिया। "यूनानी" शब्द "आयोनिया (Iōnía)", अर्थात यूनान (ग्रीस) से लिया गया है। यह चिकित्सा पद्धति प्राकृतिक उपचार, रोगों की रोकथाम तथा शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के संतुलन पर विशेष बल देती है।
अस्क्लेपियस (Asclepius) (ग्रीक: Asklepios, लैटिन: Aesculapius), जिन्हें यूनानी ग्रंथों में अस्कालीबूस (Asqaliboos) कहा जाता है, प्राचीन यूनान के एक प्रसिद्ध चिकित्सक थे, जिन्हें बाद में चिकित्सा एवं उपचार के देवता के रूप में सम्मानित किया गया। वे चिकित्सा ज्ञान, उपचार-कौशल और करुणा के प्रतीक माने जाते थे। उनके हाथ में सर्प से लिपटा हुआ दण्ड (Rod of Asclepius) आज भी विश्वभर में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं का एक प्रसिद्ध प्रतीक माना जाता है।
यूनानी चिकित्सा पद्धति का विकास हिप्पोक्रेट्स (Hippocrates), जिन्हें यूनानी चिकित्सा में बुक़रात (Buqrat) कहा जाता है, के सिद्धांतों पर भी आधारित है। उन्हें "चिकित्सा का जनक (Father of Medicine)" माना जाता है। उन्होंने रोगों के सूक्ष्म अवलोकन, तर्कसंगत निदान तथा चिकित्सा में नैतिक सिद्धांतों पर विशेष बल दिया। उनके पश्चात गैलेन (Galen), जिन्हें यूनानी चिकित्सा में जालीनूस (Jalinoos) कहा जाता है, ने शरीर रचना (Anatomy), शरीर क्रिया विज्ञान (Physiology), उपचार पद्धतियों तथा अख़लात (Humoral Pathology) के सिद्धांतों को व्यवस्थित रूप से विकसित किया। यही सिद्धांत आगे चलकर यूनानी चिकित्सा पद्धति की आधारशिला बने।
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